सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल दीपावली: पटाखों से जुड़ी ज़रूरी सावधानियाँ
दीपावली ख़ुशियों का त्योहार है, लेकिन हर साल पटाखों से जलने और आग लगने की कई घटनाएँ भी होती हैं। थोड़ी-सी सावधानी से हम अपने परिवार और आस-पास के लोगों को सुरक्षित रख सकते हैं।
पटाखे चलाते समय
- पटाखे हमेशा खुली जगह पर चलाएँ, घर के अंदर, गलियों में खड़ी गाड़ियों या सूखी घास के पास नहीं।
- सूती कपड़े पहनें। ढीले और सिंथेटिक कपड़े जल्दी आग पकड़ते हैं।
- पास में पानी से भरी बाल्टी और रेत रखें।
- बच्चों को कभी अकेले पटाखे न चलाने दें, किसी बड़े की मौजूदगी ज़रूरी है।
- फुलझड़ी जलाने के बाद उसकी गरम तार को पानी की बाल्टी में डालें, ज़मीन पर न फेंकें।
- जो पटाखा जला न हो, उसके पास दोबारा न जाएँ और उसे फिर से जलाने की कोशिश न करें।
- पटाखों को जेब में न रखें और उन्हें हाथ में पकड़कर न जलाएँ।
अगर कोई जल जाए
जली हुई जगह को तुरंत 10–15 मिनट तक साफ़, सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। उस पर बर्फ़, टूथपेस्ट, घी या कोई घरेलू नुस्ख़ा न लगाएँ। जली त्वचा पर चिपका कपड़ा ज़बरदस्ती न हटाएँ। आँख में चोट लगे, जलन बड़ी हो या छाले ज़्यादा हों तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।
पर्यावरण का ख़याल
- कम धुएँ और कम शोर वाले "ग्रीन" पटाखे चुनें, और उतने ही ख़रीदें जितने ज़रूरी हों।
- अपने शहर और राज्य में पटाखों से जुड़े नियम और समय-सीमा की जानकारी रखें और उनका पालन करें।
- मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करें — इससे कुम्हारों की रोज़ी-रोटी भी चलती है।
- प्लास्टिक की सजावट की जगह फूल, पत्तियाँ और कपड़े की चीज़ें इस्तेमाल करें।
- रंगोली के लिए फूलों की पंखुड़ियाँ, चावल का आटा या हल्दी जैसी प्राकृतिक चीज़ें लें।
जानवरों और बुज़ुर्गों का ध्यान
तेज़ धमाकों से पालतू जानवर, गली के कुत्ते और पक्षी बहुत डर जाते हैं। बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों और दिल या साँस के मरीज़ों को भी शोर और धुएँ से परेशानी होती है। रात देर तक तेज़ आवाज़ वाले पटाखे न चलाएँ।
ख़ुशी बाँटने के और तरीके
दीपावली मनाने के लिए धमाके ज़रूरी नहीं। परिवार के साथ दीये जलाना, मिठाई बाँटना, ज़रूरतमंद बच्चों को कपड़े या किताबें देना, और दूर रहने वाले अपनों को अपनी फ़ोटो और नाम वाली डिजिटल शुभकामना भेजना भी उतना ही आनंद देता है — बिना धुएँ, बिना शोर।