जन्माष्टमी: श्रीकृष्ण जन्म की कथा, व्रत, झाँकी और दही-हांडी
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए इस पर्व की मुख्य पूजा रात 12 बजे होती है।
जन्म की कथा
मथुरा का राजा कंस बहुत अत्याचारी था। आकाशवाणी हुई थी कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी। डर के मारे कंस ने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनकी संतानों को मारता रहा। आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उस रात कारागार के ताले अपने आप खुल गए, पहरेदार सो गए और वसुदेव मूसलाधार बारिश में उफनती यमुना पार करके बालक कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के घर छोड़ आए। वहीं कृष्ण का बचपन बीता।
व्रत और पूजा
- भक्त दिन भर व्रत रखते हैं; कुछ लोग निर्जल और कुछ फलाहार करते हैं।
- घरों और मंदिरों में बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) को नहलाकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और झूले में बिठाया जाता है।
- रात 12 बजे जन्म के समय शंख, घंटियाँ बजाकर आरती की जाती है और भजन गाए जाते हैं।
- भोग में माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचामृत और फल चढ़ाए जाते हैं। धनिया की पंजीरी इस दिन ख़ास तौर पर बनती है।
- पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
झाँकियाँ
मंदिरों और मोहल्लों में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी झाँकियाँ सजाई जाती हैं — कारागार में जन्म, यमुना पार करना, माखन चोरी, कालिया नाग का दमन और गोवर्धन पर्वत उठाना। बच्चे कृष्ण और राधा बनकर तैयार होते हैं।
दही-हांडी
महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई जगह जन्माष्टमी के अगले दिन दही-हांडी का उत्सव होता है। ऊँचाई पर दही-माखन से भरी मटकी टाँगी जाती है और "गोविंदा" टोलियाँ मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं। यह कृष्ण की माखन चोरी की लीलाओं की याद में किया जाता है। इसमें सुरक्षा बहुत ज़रूरी है — हेलमेट, नीचे गद्दे और प्रशिक्षित टीम के बिना ऊँचे पिरामिड न बनाएँ।
मथुरा और वृंदावन
श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी लीलाभूमि वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव कई दिनों तक चलता है। लाखों श्रद्धालु यहाँ के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
कृष्ण का संदेश
गीता में श्रीकृष्ण ने कर्म करने और फल की चिंता न करने का संदेश दिया। जन्माष्टमी हमें याद दिलाती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ हों, सच्चाई और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए — और जीवन को मुस्कान और प्रेम के साथ जीना चाहिए।