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ईद-उल-फ़ित्र: रमज़ान के बाद ख़ुशी और भाईचारे का त्योहार

ईद-उल-फ़ित्र इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल की पहली तारीख़ को मनाई जाती है। यह रमज़ान के पूरे महीने के रोज़ों (उपवास) के बाद आती है, इसलिए इसे रोज़े पूरे होने की ख़ुशी और अल्लाह का शुक्र अदा करने का त्योहार माना जाता है। "फ़ित्र" शब्द का संबंध रोज़ा खोलने से है।

रमज़ान का महीना

रमज़ान में रोज़ा रखने वाले लोग सुबह सूरज निकलने से पहले "सहरी" करते हैं और शाम को सूरज डूबने पर "इफ़्तार" से रोज़ा खोलते हैं। इस महीने में नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, संयम और दान पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।

चाँद रात

रमज़ान के आख़िरी दिनों में सबकी नज़रें आसमान पर रहती हैं। जिस शाम शव्वाल का नया चाँद दिखता है, वह "चाँद रात" कहलाती है और अगले दिन ईद होती है। चाँद दिखने के अनुसार अलग-अलग देशों और कभी-कभी अलग-अलग इलाक़ों में ईद एक दिन आगे-पीछे भी हो सकती है। चाँद रात को बाज़ारों में ख़ूब रौनक़ होती है — महिलाएँ मेहंदी लगवाती हैं और चूड़ियाँ ख़रीदती हैं।

ज़कात-उल-फ़ित्र (फ़ितरा)

ईद की नमाज़ से पहले हर सक्षम परिवार ज़रूरतमंदों को एक तय मात्रा में अनाज या उसके बराबर रक़म देता है, जिसे "फ़ितरा" या "ज़कात-उल-फ़ित्र" कहते हैं। इसका मक़सद यह है कि ईद की ख़ुशी में कोई भी भूखा या उदास न रहे।

ईद का दिन

  • सुबह नहाकर लोग नए या साफ़ कपड़े पहनते हैं और इत्र लगाते हैं।
  • कुछ मीठा, अक्सर खजूर, खाकर ईदगाह या मस्जिद में ईद की ख़ास नमाज़ अदा करने जाते हैं।
  • नमाज़ के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर "ईद मुबारक" कहते हैं।
  • बड़े बच्चों को "ईदी" के रूप में पैसे या तोहफ़े देते हैं।
  • रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाकर मिलने-मिलाने का सिलसिला चलता है।

सेवइयाँ — ईद की मिठास

ईद को "मीठी ईद" भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन हर घर में दूध वाली सेवइयाँ, शीर ख़ुरमा (दूध, सेवइयाँ और खजूर से बना पकवान) और तरह-तरह की मिठाइयाँ बनती हैं। मेहमानों का स्वागत इन्हीं से किया जाता है।

ईद-उल-अज़हा से अंतर

ईद-उल-फ़ित्र को ईद-उल-अज़हा (बक़रीद) से अलग समझना चाहिए। बक़रीद लगभग दो महीने बाद आती है और हज़रत इब्राहीम की क़ुर्बानी की याद में मनाई जाती है।

भाईचारे का संदेश

भारत में ईद पर हर धर्म के लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं और सेवइयों का स्वाद लेते हैं। ईद हमें सिखाती है कि संयम, शुक्रगुज़ारी और दूसरों की मदद से ही सच्ची ख़ुशी मिलती है।