क्रिसमस क्यों मनाया जाता है? यीशु मसीह का जन्म, परंपराएँ और भारत में क्रिसमस
क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को ईसा मसीह (यीशु मसीह) के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाता है। यह ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, लेकिन आज दुनिया भर में हर धर्म के लोग इसे प्रेम, दया और ख़ुशियाँ बाँटने के पर्व के रूप में मनाते हैं।
यीशु के जन्म की कथा
बाइबिल के अनुसार यीशु का जन्म बेथलेहम में हुआ था। माता मरियम और यूसुफ़ को सराय में जगह नहीं मिली, इसलिए यीशु का जन्म एक साधारण गौशाला में हुआ और उन्हें चरनी (पशुओं के चारे की जगह) में लिटाया गया। आसमान में चमकते एक तारे के सहारे पूर्व से तीन ज्ञानी उन्हें उपहार देने आए। इसी कारण क्रिसमस पर तारा और "नैटिविटी" (जन्म का दृश्य) सजाने की परंपरा है।
क्रिसमस की परंपराएँ
- क्रिसमस ट्री: सदाबहार पेड़ को रोशनी, सितारों, घंटियों और रंगीन गेंदों से सजाया जाता है। पेड़ के ऊपर लगा तारा बेथलेहम के तारे का प्रतीक है।
- मिडनाइट मास: 24 दिसंबर की रात चर्च में विशेष प्रार्थना होती है।
- कैरल्स: लोग समूह में घर-घर जाकर क्रिसमस के गीत गाते हैं।
- सांता क्लॉज़: लाल कपड़ों और सफ़ेद दाढ़ी वाले सांता की कहानी चौथी सदी के संत निकोलस से प्रेरित है, जो ज़रूरतमंद बच्चों को चुपके से उपहार देते थे।
- केक और उपहार: प्लम केक, कुकीज़ और एक-दूसरे को उपहार देना इस त्योहार का अहम हिस्सा है।
- सीक्रेट सांता: दोस्त और ऑफ़िस के साथी एक-दूसरे को बिना नाम बताए उपहार देते हैं।
भारत में क्रिसमस
भारत में क्रिसमस को "बड़ा दिन" भी कहा जाता है।
- गोवा: पुराने चर्च रोशनी से जगमगाते हैं, आधी रात की प्रार्थना होती है और घरों में ख़ास गोअन मिठाइयाँ बनती हैं।
- केरल: घरों के बाहर कागज़ के बड़े-बड़े तारे (नक्षत्र) टाँगे जाते हैं।
- पूर्वोत्तर राज्य (मिज़ोरम, नागालैंड, मेघालय): पूरा क्षेत्र कई दिनों तक सामुदायिक भोज और संगीत के साथ उत्सव मनाता है।
- कोलकाता: पार्क स्ट्रीट की सजावट और रोशनी देखने बड़ी भीड़ आती है।
- बड़े शहरों में मॉल, स्कूल और कॉलोनियाँ भी क्रिसमस ट्री और सांता के साथ सजती हैं।
क्रिसमस का संदेश
यीशु मसीह ने प्रेम, क्षमा और दूसरों की सेवा का संदेश दिया। क्रिसमस हमें याद दिलाता है कि सबसे बड़ी ख़ुशी देने में है — किसी ज़रूरतमंद को खाना, ठंड में कंबल, या किसी अकेले व्यक्ति के साथ बिताया थोड़ा-सा समय भी सच्चा क्रिसमस उपहार है।